**माल हिमाचल का, रवन्ना हरियाणा का? उत्तराखंड में खनन परिवहन की निगरानी पर उठे सवाल**

**माल हिमाचल का, रवन्ना हरियाणा का? उत्तराखंड में खनन परिवहन की निगरानी पर उठे सवाल**

**सूत्रों से मिली सूचना के बाद जीपीएस लोकेशन, ई-रवन्ना और वास्तविक लोडिंग स्थल के सत्यापन की जरूरत**

देहरादून। उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आने वाली खनन सामग्री के परिवहन को लेकर सूत्रों से मिली एक सूचना ने दस्तावेजों की जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की ओर से उत्तराखंड में खनन सामग्री लेकर आने वाले कुछ वाहनों के साथ हरियाणा से संबंधित परिवहन दस्तावेज इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई है। हालांकि इस जानकारी की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि अंतरराज्यीय खनन परिवहन के दौरान वाहनों के वास्तविक लोडिंग स्थल, ई-रवन्ना, धर्मकांटे की पर्चियों और जीपीएस लोकेशन का मिलान किस स्तर पर किया जा रहा है। यदि किसी वाहन की लोडिंग एक राज्य में हुई है और उसके दस्तावेज दूसरे राज्य से संबंधित हैं, तो उसकी वैधता संबंधित राज्यों के नियमों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट की जानी चाहिए।

खनन सामग्री की निगरानी से जुड़ी कंपनी और संबंधित विभागों के लिए भी यह महत्वपूर्ण विषय है। क्या वाहनों के परिवहन मार्ग की जीपीएस हिस्ट्री जांची जाती है? क्या दूसरे राज्यों से जारी दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित विभागों से किया जाता है? इन सवालों के जवाब से निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता स्पष्ट हो सकती है।

इस सूचना के आधार पर किसी वाहन संचालक, कारोबारी अथवा कंपनी द्वारा फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने की पुष्टि नहीं होती। न ही अभी किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित हुई है।

जनहित में आवश्यक है कि उत्तराखंड का खनन विभाग और संबंधित निगरानी एजेंसियां सूचना का सत्यापन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। इससे जहां परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी, वहीं नियमों के अनुसार कारोबार करने वाले वाहन संचालकों और व्यापारियों के हित भी सुरक्षित रहेंगे।

पिछले कई वर्षों से हरियाणा प्रदेश के रवन्नों का खेल उत्तराखंड पुलिस द्वारा पकड़ा गया है और सिंडिकेट पर कार्रवाई भी हुई है। परंतु निजी खनन टीम और खनन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाना लाजमी है।