पछवादून की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड डंपर, धर्मकांटों पर लाखों का खेल! परिवहन विभाग पर बड़ा सवाल
सूत्रों का दावा—खनन सामग्री में 5 से 10 टन तक अतिरिक्त वजन की पर्चियां बनवाने का खेल, सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के आदेशों की हो रही अवहेलना, डीएम से गोपनीय जांच की मांग
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**देहरादून।** पछवादून क्षेत्र की सड़कों पर सैकड़ों ओवरलोड और ओवरहाइट डंपर मौत का सबब बनकर दौड़ रहे हैं। मोटर व्हीकल एक्ट का खुला उल्लंघन हो रहा है, फिर भी इन वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र आसानी से मिल जा रहा है। सूत्रों का आरोप है कि परिवहन विभाग इन वाहनों से प्रतिमाह मोटी एंट्री ले रहा है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा धर्मकांटों से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार जिले के कुछ धर्मकांटों पर खनन सामग्री से भरे डंपरों के वास्तविक वजन से 5 से 10 टन तक अधिक वजन की कांटा पर्चियां बनवाई जा रही हैं। इस कथित व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ वाहन स्वामी ग्राहकों से अतिरिक्त भुगतान वसूल रहे हैं।
अगर धर्मकांटे की पर्ची ही सही वजन का प्रमाण नहीं है तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? मकान बनाने वाला हो या निर्माण सामग्री खरीदने वाला छोटा व्यापारी, हर कोई धर्मकांटे की पर्ची के आधार पर ही भुगतान करता है। पांच से दस टन तक के अंतर की आशंका गंभीर जांच का विषय है।
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जिले के सभी धर्मकांटों या वाहन स्वामियों को संदेह के घेरे में नहीं खड़ा किया जा सकता। बड़ी संख्या में वाहन स्वामी और चालक ईमानदारी से काम कर रहे हैं। अगर कुछ जगहों पर अनियमितताएं हो रही हैं तो उनका नुकसान ईमानदार कारोबारियों को भी उठाना पड़ सकता है।
जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान से अपेक्षा है कि इस संवेदनशील मामले में गोपनीय और तकनीकी जांच करवाई जाए। विधिक माप विज्ञान विभाग और खनन विभाग की संयुक्त टीम संदिग्ध धर्मकांटों की मशीनों, सत्यापन प्रमाणपत्रों, डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और कांटा पर्चियों का मिलान करे। जरूरत पड़ने पर चयनित वाहनों का स्वतंत्र प्रमाणित धर्मकांटे पर दोबारा वजन भी करवाया जाए।
जांच का मकसद किसी निर्दोष वाहन चालक या धर्मकांटा संचालक को परेशान करना नहीं, बल्कि वास्तविक अनियमितता की पहचान करना होना चाहिए। अगर जानबूझकर गलत वजन दर्शाने और अतिरिक्त वसूली की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
परिवहन विभाग पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ओवरहाइट और ओवरलोड डंपरों को फिटनेस प्रमाण पत्र कैसे मिल रहा है? सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना कैसे हो रही है? क्या सुविधा शुल्क आम जनमानस की जान से ज्यादा जरूरी हो गया है?
देहरादून में खनन सामग्री का कारोबार हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। इसलिए किसी भी कार्रवाई में निर्दोष कारोबारियों के सम्मान और आम जनता के आर्थिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
धर्मकांटे की पर्ची केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्राहक के पैसे और भरोसे का प्रमाण है। उस भरोसे की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पछवाड़ून की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड-ओवरहाइट डंपर!
धर्मकांटों पर लाखों का खेल—5 से 10 टन तक अतिरिक्त वजन की पर्चियां बनवाने का आरोप।
परिवहन विभाग पर बड़ा सवाल—फिटनेस प्रमाण पत्र कैसे मिल रहा है?
डीएम आशीष चौहान से गोपनीय जांच की मांग।
सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के आदेशों की हो रही अवहेलना।
