**छत्रधारी चालदा महासू महाराज 40 साल बाद मशक गांव के नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होंगे**
जौनसार बावर (चकराता)। छत्रधारी चालदा महासू महाराज का मशक गांव में नवंबर-दिसंबर में आगमन होगा। लगभग 40 साल बाद देवता नवनिर्मित मंदिर में विराजमान होंगे। क्षेत्र के लोगों में इस आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह है।
इन दिनों छत्रधारी चालदा महासू महाराज हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव में एक साल के प्रवास पर हैं। इसके बाद नवंबर-दिसंबर में जौनसार बावर के मशक गांव में उनका आगमन तय है। मशक गांव चकराता ब्लॉक के अंतर्गत आता है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह गांव चारों ओर देवदार के ऊंचे वृक्षों और पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है।
देवता के आगमन को ध्यान में रखकर पिछले कई वर्षों से नए मंदिर का निर्माण चल रहा था, जो अब लगभग पूरा हो चुका है। खास बात यह है कि मंदिर का निर्माण ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और अपने संस्थानों से कराया है। मंदिर निर्माण के लिए ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंदन सिंह, जगत सिंह, गोविंद सिंह, प्रेम सिंह, महावीर सिंह और जयपाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से इस कार्य में योगदान दिया।
मंदिर निर्माण में लगे मिस्त्रियों को विशेष नियमों का पालन करना होता है। मिस्त्री श्याम सिंह खन्ना सुबह स्नान कर खाली पेट ही निर्माण कार्य शुरू करते हैं और दोपहर बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद निर्माण कार्य नहीं किया जाता। मंदिर में देवदार की लकड़ी और पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में नक्काशी की अद्भुत कलाकृतियां उकेरी गई हैं।
मशक गांव के सदर स्याणा फतेह सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने मंदिर निर्माण में पूरा सहयोग किया है। क्षेत्र के लोगों में छत्रधारी चालदा महासू महाराज के प्रति गहरी आस्था और अटूट विश्वास है। देवता के प्रवास यात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह बना हुआ है और लोग उनके आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
