MDDA में RTI आवेदन के निस्तारण में गंभीर लापरवाही, आयोग सख्त** राज्य सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने जारी किए कारण बताओ नोटिस

 

देहरादून, उत्तराखंड मंगलवार, 4 अगस्त 2026

**MDDA में RTI आवेदन के निस्तारण में गंभीर लापरवाही, आयोग सख्त**

राज्य सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने जारी किए कारण बताओ नोटिस

**7 महीने तक सूचना नहीं देने और अपील का निस्तारण न करने पर PIO और प्रथम अपील अधिकारी को नोटिस**

विशेष संवाददाता
देहरादून।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) में सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के निस्तारण में गंभीर लापरवाही पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने लोक सूचना अधिकारी (PIO) और विभागीय प्रथम अपीलीय अधिकारी दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

आयोग ने अपने 3 अगस्त 2026 के आदेश में कहा कि RTI आवेदन पर करीब सात महीने तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि आयोग के संज्ञान में मामला आने और नोटिस जारी होने के बाद भी समय पर सूचना नहीं दी गई।

आयोग ने इसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के विपरीत माना है।

**क्या है पूरा मामला?**
विकासनगर निवासी कविता कौर ने 22 दिसंबर 2025 को MDDA से चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। समय पर जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने 23 फरवरी 2026 को प्रथम अपील दायर की, लेकिन विभागीय अपीलीय अधिकारी ने भी उसका निस्तारण नहीं किया। इसके बाद 31 मार्च 2026 को राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की गई।

सुनवाई के दौरान विभाग ने बताया कि 7 अप्रैल 2026 को सूचना उपलब्ध कर दी गई थी, लेकिन आयोग ने माना कि सूचना तय समय-सीमा में नहीं दी गई और विभाग ने अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं किया।

**इन अधिकारियों को नोटिस**
– आयोग ने लोक सूचना अधिकारी एवं सहायक अभियंता शशांक सक्सेना को RTI Act की धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया।
– वहीं, विभागीय प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता सुनील कुमार को भी प्रथम अपील का निस्तारण नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
– दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने और लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।

**MDDA को दिए निर्देश**
आयोग ने MDDA के उपाध्यक्ष/सचिव को निर्देश दिए हैं कि RTI आवेदनों और प्रथम अपीलों का समयबद्ध, विधिसम्मत और जवाबदेही के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

**समय-सीमा का नहीं हुआ पालन**
आयोग ने कहा कि RTI आवेदन पर 30 दिन के अंदर सूचना देना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश सूचना देने में देरी होती है तो कारण स्पष्ट करना आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं किया गया। अपीलों का निस्तारण भी तय समय-सीमा में नहीं हुआ।

“सूचना का अधिकार नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है। इसमें लापरवाही क्षम्य योग्य नहीं है।”
– उत्तराखंड सूचना आयोग

**22 सितंबर 2026 तक जवाब तलब**
आयोग ने दोनों अधिकारियों को 22 सितंबर 2026 तक कारण बताओ नोटिस का अनुपालन करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।